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टैग्स: भोपालशहर


ब्लॉग्स (8)

१. कितने पास फ़िर भी कितने दूर - सड़क ने बाँटा.२. मैं बड़ा कि तू बड़ा - वर्चस्व की लड़ाई.३. अरे! ये तो ग्रीन-बेल्ट लग रही है. . . - शायद अतिक्रमण है.(स्थान: सेकंड स्टाप, भोपाल) आगे पढ़ें...

ये कौन सा खेल है -मैं बताऊँ, COPY-PASTE (कापी-पेस्ट) का, यहाँ से सभी के लिए लगाई गई टाइल्स (tiles) निकालो और अपने घर में लगाओ ! इसको चोरी भी कहा जाता है . (location: Bhopal, The Science Centre Road)(स्थान: भोपाल, साइंस सेंटर रोड) आगे पढ़ें...


पेट्रोल की बात मैंने पिछले लेख में की, इस बार बात उसके जलने के बाद बनने वाले धुएं की. अगर आपको याद हो कुछ सालों पहले पी.यू.सी.(पाल्यूशन अंडर कंट्रोल) चेक की मुहीम शुरू हुई थी. अन्य सरकारी मुहिमों की तरह यह भी मध्यम-वर्गीय परिवारों को चूना लगाकर कुम्भकरणी नींद सो गई. हो सकता है इतने सालों बाद भूख से व्याकुल होकर उसकी नींद खुल जाए,तो तैयार रहने में ही भलाई है. आगे पढ़ें...

हेलमेट चेकिंग मुहीम फिर से शुरू हो यह मांग दैनिक भास्कर के एक सिटिजन रिपोर्टर की है. अब इससे बुरा और क्या हो सकता है कि जनता अपने पैरों पर खुद कुल्हाडी मार ले.मूल लेख में मैंने कुछ अनुमानित आंकडे दिए थे जो (लगभग) सही निकले, मरने वालों कि सख्या 750 न होकर ... आगे पढ़ें...

तीन अधूरे सच: यह लेख लिखते समय मैंने सोचा था की एक पेज से ज्यादा नही होगा पर जैसे-जैसे मैं लिखता गया .. ............ तीन भाग हैं: १. 'मर्जी है आपकी आखिर 'नारियल' है आपका', जो इस हफ्ते प्रकाशित कर रहा हूँ. २. 'फिल्म अभी बाकी है मेरे दोस्त', और ३. 'हर फिक्र को धुएँ में उडाते चलो', जो अगले हफ्ते प्रकाशित होंगे. आगे पढ़ें...

सन् १९३० में हुए दांडी मार्च को २००८ मे भी याद किया जाता है पर अप्रैल २००८ में हुई एक पदयात्रा जो किसी भी सूरत में दांडी से कम नही है, पर कोई ध्यान नही देता। हो सकता है की हमने इसपर इसलिए ध्यान न दिया हो क्योंकि इसमे गांधी जैसा कोई नेता नही था, या फिर ... आगे पढ़ें...