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वेब-मास्टर जी आपसे ये उम्मीद नही थी !


वेब-मास्टर जी आपसे ये उम्मीद नही थी


क्या यहाँ भी तानाशाही चलती है, सच का गला घोंटा जाता है.

चोरों को बढ़ावा देते नव-दुनिया और वेब-दुनिया !
अपने लेखों को चोरों से बचाएँ!

इसमे क्या आपत्तिजनक है कृपा करके ये भी बता दें!

देखें इसी नाम से मेरा लेख अधिक ब्लॉगस के अंतर्गत !



प्रतिक्रियाएँ

Re: वेब-मास्टर जी आपसे ये उम्मीद नही थी !
प्रिय रितेश, मेरे ख्याल से आपको थोड़े धैर्य से काम लेकर परिपक्वता का परिचय देना चाहिए. आप को यदि अपनी आपत्ति दर्ज करानी है तो उसके और भी बेहतर तरीके हैं. अव्वल तो यही समझ मे6 नही आ रहा कि आपको आपत्ति किस बात से है.
Re: वेब-मास्टर जी आपसे ये उम्मीद नही थी !
जयदीप जी, आपको मेल भेजी है, एक बार देख लें. धन्यवाद.
Re: वेब-मास्टर जी आपसे ये उम्मीद नही थी !
प्रिय रितेश, मुझे आपका मेल अभी नहीं मिला है. कृपया jaideep@webdunia.net पर भेज दें. अवश्य उत्तर मिलेगा.
संदीप जी को जवाब !
मेरा पक्ष सुने बैगर मेरे बारे में आप ऐसा कैसे कह सकते हैं, खैर ! १. मैंने वेब-दुनिया पर चोरी का इल्जाम नही लगाया है. २. रिपोर्ट एब्यूज करने के लिए क्या २४-घंटे बैठे रहें ! चोरों की बुराई करना छोड़कर मेहनत करने वालों की बुराई करते हो, आपका तो भगवान् ही मालिक है. [copy-paste kar sakta hai, हाँ भई करो कापी-पेस्ट से ही तो ये देश चल रहा है] ३. जैसा कि एक बन्धु राजा ने कहा, तथ्यों और सबूतों की बात करो, मौलिकता को सबूत नही चाहिए, पर चोरी को अवश्य चाहिए. आगे आपकी मर्ज़ी.
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