
'सिंह इज किंग' (Singh is Kinng) के प्रोमो में अक्की (अक्षय कुमार) ने बताया की सरदार-चुटकुलों से वो काफ़ी आहत होते थे और एक ऐसी फ़िल्म में काम करना चाहते थे जिसमे सिखों (सरदारों) का असल व्यक्तित्व सामने आए. उनकी मेहनत, शोहरत और ताकत की इज्ज़त हो. भगवान ने उनकी सुन ली और सामने आई 'सिंह इज किंग'.
पर लगता है कलयुग में भगवान टीवी भी देखते हैं, नही तो कहानी में टुविस्ट (twist) कहाँ से आता. एक ओर जहाँ अक्की गा रहे हैं 'सिंह इज किंग' वहीं हमारे प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह जी किंग बने रहने की जद्दोजहद में दिन-रात एक कर रहे हैं.
थोड़ा मानसिक जुगाली आप भी करें और सोचें कि सरकार के भविष्य से क्या सिखों का भविष्य नही जुड़ गया है. मनमोहन जी अगर आर या पार वाली लडाई लड़ें यानि या तो डील छोड़ दें या फ़िर कुर्सी, तब भी उनका मजाक बनने से कोई नही रोक सकता. सामने भले कोई न कहे पर मन ही मन तो कहेगा ही - काहे का 'सिंह इज किंग', 'सिंह इज येट एनअदर थिंग' (What Singh is King, Singh is Yet Another Thing). गानों के बोल गाली बन जाएंगे और सरदारों का ऐसा मजाक बनेगा जैसा कभी नही बना.
हाँ अगर मनमोहन जी वाम-दलों को साथ लेकर डील कर लें तब तो सभी कि जुबां पर होगा - 'मनमोहन सिंह इज सर्टेनली अ किंग'.
देखें भगवान को क्या मजूर है, तब तक ये बोल गुनगुनाएं -
"दुनिया के बन गए सिंह बादशाह,
पर सब तो ऊंचा ओ सच्चा बादशाह."

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